Friday, March 29, 2019

हादसा दर हादसा

ग़ज़ल
बदलती है जिन्दगी, हादसा दर हादसा ।
निखरती है सादगी, हादसा दर हादसा ।
कातिलोंं की बज़म में, आ गया था ए खुदा,
कर रहा हूं वापसी, हादसा दर हादसा ।
वक्त को वक्त से चल तराश लवें, कि जो,
बदलता है हर घड़ी , हादसा दर हादसा ।
आंख की ना बात कर,आंख तो फिर आंख हैं,
आंख कह दे अनकही,हादसा दर हादसा ।
कसम से तेरी अदा, है बला की सितमगर,
जान की दुश्मन बनी, हादसा दर हादसा ।
"चौहान"




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